लखनऊ। लखनऊ खंड शिक्षक विधान परिषद सदस्य (MLC) सीट पर भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सुशील कुमार को 4,808 मतों के अंतर से पराजित किया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों ने उमेश द्विवेदी को बधाई दी और उनके लगातार तीसरी बार निर्वाचित होने पर प्रसन्नता जताई।

13,179 मत पाकर जीते उमेश द्विवेदी
शिक्षक MLC चुनाव में भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी को कुल 13,179 मत प्राप्त हुए, जबकि सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को 8,371 मत मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर 4,808 मतों का रहा। इस जीत के साथ उमेश द्विवेदी ने लगातार तीसरी बार लखनऊ खंड शिक्षक MLC सीट पर अपना प्रतिनिधित्व कायम रखा।
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व का जताया आभार
जीत के बाद उमेश द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने एक सामान्य शिक्षक को लखनऊ जैसी राजधानी की महत्वपूर्ण सीट से लगातार तीसरी बार प्रत्याशी बनाया, इसके लिए वह पार्टी के आभारी हैं।
उन्होंने चुनाव में लगातार तीसरी बार उन पर भरोसा जताने वाले शिक्षकों का भी धन्यवाद किया। उमेश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षकों के आन, बान और शान की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर वह किसी से भी टकराने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस बयान को शिक्षक हितों के लिए संघर्ष जारी रखने के उनके संकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

उमेश द्विवेदी की जीत के बाद विद्यालय वि०कुं०स्मा० सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, गोला गोकर्णनाथ, खीरी के प्रबंधक ओम प्रकाश मिश्रा एवं वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक मिश्रा ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने उन्हें लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुलाकात के दौरान उमेश द्विवेदी की चुनावी जीत और शिक्षक प्रतिनिधित्व से जुड़े विषय चर्चा में रहे। उनकी जीत को लखनऊ खंड शिक्षक MLC चुनाव के प्रमुख परिणामों में गिना जा रहा है।
शिक्षकों के भरोसे पर खरे उतरने की चुनौती
लगातार तीसरी बार जीत दर्ज करने के बाद उमेश द्विवेदी के सामने शिक्षकों की समस्याओं, उनके अधिकारों और शैक्षिक हितों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी बनी रहेगी। चुनाव में मिले मत उनके समर्थन का आंकड़ा प्रस्तुत करते हैं, जबकि आगामी कार्यकाल में शिक्षक समुदाय की अपेक्षाओं पर खरा उतरना उनके प्रतिनिधित्व की अहम कसौटी होगा।
